सतत यात्रा है जीवन,
दृश्य-अदृश्य जगत,माया।
कण कण है गति मय जबतक।
जीवन सृजन, सृष्टि में,
नया रूप ले,नई चेतना में पनपेगा।।
खोना पाना,कभी दूर सा लगना
मन के द्वारे,कौन कहाँ खोता है।।
है प्रेममय यदि अंतर्मन,
प्रेम सतत बहता है,
अस्तित्व सदा रहता है।।
स्वरचित(अरुण धस्माना)